Bharat Devotion

दिगंबर

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

Sky-clad

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

From Sanskrit 'dik' (direction) + 'ambara' (clothing) — literally 'clothed in the directions,' i.e. unclothed.

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

Digambara monks renounce clothing entirely as the fullest expression of non-attachment, distinguishing this Jain tradition from the white-robed Svetambara.

दिगंबर का उल्लेख इन लेखों में

आत्म-शुद्धि, त्याग एवं मिच्छामि दुक्कडं का पावन पर्व

वर्ष का सबसे पवित्र जैन पर्व — आठ से दस दिनों का उपवास, शास्त्र-अध्ययन तथा आत्म-चिंतन, जो संवत्सरी तथा सार्वभौमिक क्षमा-याचना 'मिच्छामि दुक्कडम्' में परिणत होता है।

जैन धर्म का अपरिग्रह व्रत

भद्रबाहु, अंतिम श्रुतकेवली जिन्होंने संपूर्ण जैन शास्त्र स्मृति में धारण किए, उस अकाल के साक्षी बने जिसने उनकी स्मृति को कर्नाटक और नेपाल के बीच विभाजित कर दिया।

राजा सिंहसेन तथा रानी सुयशा के पुत्र, चौदहवें तीर्थंकर, एक विशाल राज्य का त्याग करते हैं उस असीम मुक्ति हेतु जिसका वचन उनके अपने ही नाम ने दिया था।

जैन धर्म की दो परंपराएं