चार आर्य सत्य
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
चार श्रेष्ठ सत्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'आर्य' (श्रेष्ठ) और 'सत्य' से बना; सारनाथ में बुद्ध के प्रथम उपदेश का सार, जो दुःख, उसका कारण, उसका अंत और मार्ग बताता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह चार-भागीय निदान चिकित्सक की पद्धति जैसा है: रोग पहचानो, कारण खोजो, इलाज संभव है यह पुष्टि करो, और उपचार बताओ।