गुरबाणी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गुरु की वाणी
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'गुरु' + 'बाणी' (वचन) से — सिख गुरुओं तथा भगतों की दैवीय प्रेरित रचनाएं, जिन्हें मानवीय काव्य नहीं बल्कि प्रकट सत्य माना जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित, गुरबाणी को सिखों हेतु जीवंत गुरु के रूप में माना जाता है, जो नित्य नितनेम में पढ़ी तथा कीर्तन में गाई जाती है।