इक ओंकार
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
एक सर्वव्यापी परमात्मा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
अंक '1' और 'ओंकार' (ओम का विस्तार) के मेल से बना, गुरु ग्रंथ साहिब के मूल मंत्र का प्रथम शब्द।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह सिख धर्म की मूलभूत घोषणा है कि परमात्मा एक है, निराकार है, और सभी धर्मों व लोगों से परे है — गुरबाणी के प्रथम शब्द।