Bharat Devotion

जातक

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

जन्म-कथा

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत/पालि 'जात' (जन्मा हुआ) से, बुद्ध के बोधिसत्त्व रूप में पूर्वजन्मों का निर्देश करता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

बुद्ध के 547 पारंपरिक पूर्वजन्म-कथाओं में से एक, जो औपचारिक सिद्धांत के बजाय सुगम दृष्टांतों द्वारा कर्म तथा सद्गुण सिखाती है।

जातक का उल्लेख इन लेखों में

रात्रि में वनपशुओं की गर्जना से भयभीत एक शिष्य को बोधिसत्व सिखाते हैं कि भय चंचल मन में ही उत्पन्न होता है, और स्मृति (सति) से वह विलीन हो जाता है।

जातक कथाएँ क्यों अस्तित्व में हैं तथा प्रत्येक कथा किस प्रकार रचित है: तीन मूल प्रयोजन — ज्ञानोदय के मार्ग का चित्रण, कर्म की व्याख्या, तथा प्राचीन लोककथाओं का संरक्षण — जो एक आवर्ती त्रिखंडीय संरचना में गुंथे हैं जो वर्तमान की किसी दुविधा को पूर्वजन्म की कथा से जोड़ती है तथा पुनः वर्तमान में लौटाती है।

बिच्छू का डंक और कपटी मित्र

जहाँ बुद्ध तावतिंस से उतरे

दिव्य आम्र और साहसी शुक

हाथी और कुत्ते की अटूट मित्रता