कर्म
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
मन, वाणी और शरीर द्वारा किया गया कोई भी कार्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत धातु 'कृ' (करना)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कार्य और कारण का शाश्वत नियम — जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है।
मन, वाणी और शरीर द्वारा किया गया कोई भी कार्य
संस्कृत धातु 'कृ' (करना)।
कार्य और कारण का शाश्वत नियम — जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल प्राप्त होता है।
सार्वभौमिक करुणा एवं आत्म-शुद्धि का सर्वोच्च मार्ग
बुद्धि के लिए सौर आह्वान
गुरु रविदास ने सिखाया कि हर, दिव्य नाम, का चिंतन कर्म के बोझ को जला देता है तथा सबसे विनम्र भक्त को भी सर्वोच्च आध्यात्मिक स्तर तक उठा देता है।
गुरु रविदास की पूजा के रूप में श्रम की शिक्षा
बुद्ध का मध्यम मार्ग एवं आत्म-मुक्ति का अष्टांग विधान
पाँच पावन अमृत तत्व