यह देवी के कवच (रक्षा-कवच) का पाठ है, जो देवी महात्म्य (सप्तशती) के पाठ से पहले किया जाता है। इसमें नवदुर्गाओं और विभिन्न देवियों का आह्वान कर शरीर के प्रत्येक अंग और दिशाओं की रक्षा की प्रार्थना की गई है।
60 versesयह एक पवित्र प्रार्थना है, जिसे कवच कहा जाता है। इसमें भगवान शिव के अघोर रूप से सभी दिशाओं और परिस्थितियों में अपनी रक्षा करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना की जाती है।
42 versesयह एक पवित्र कवच (रक्षा स्तोत्र) है, जो भगवान मुरुगन (कंदा) की स्तुति में रचा गया है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है, तथा जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
61 versesश्रीनारायणकवचम् श्रीमद्भागवत महापुराण के छठे स्कंध के आठवें अध्याय में वर्णित ४२ श्लोकों का परम सिद्ध सुरक्षा कवच है। महर्षि विश्वरूप द्वारा देवराज इंद्र को उपदिष्ट यह कवच शरीर के प्रत्येक अंग, इंद्रिय और दिशा में भगवान श्रीहरि के विभिन्न अवतारों, पावन नामों तथा दिव्य आयुधों (सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा, पांचजन्य शंख, नंदक तलवार) की अभेद्य शक्ति स्थापित कर साधक को समस्त भयों, नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से सुरक्षित करता है।
43 verses