केवली
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सर्वज्ञ
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'केवल' (पूर्ण, शुद्ध) से बना; जिन्होंने केवलज्ञान — पूर्ण, असीम ज्ञान — प्राप्त किया है उनके लिए प्रयुक्त नाम, जबकि उनका भौतिक शरीर जीवित रहता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
केवली बनने के बाद भी, आत्मा शरीर में ही रहती है — ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती की भाँति कई केवली सामान्य जीवन जीते हुए ही पूर्ण ज्ञान प्राप्त करते हैं, अंतिम मुक्ति (निर्वाण) मृत्यु के समय ही मिलती है।