Bharat Devotion

मूल मंत्र

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

मूल जप

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'मूल' (जड़) और 'मंत्र' से बना; गुरु ग्रंथ साहिब की आरंभिक तुक, इक ओंकार से गुरप्रसादि तक।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

यह सिख धर्म की मूल आस्था का सार है — एक, सत्य, निर्भय, निर्वैर, शाश्वत परमात्मा की परिभाषा।

मूल मंत्र का उल्लेख इन लेखों में

निरंकार परमात्मा का ध्यान और स्वरूप

परम सत्य और एक सर्वशक्तिमान वास्तविकता

दिव्य स्मरण की शाश्वत गूंज

यह लेख गुरु अर्जन देव जी द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब के संकलन और गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा इसे अंतिम रूप देने तथा इसे शाश्वत, जीवित गुरु घोषित करने की कथा को सरल भाषा में बताता है।

यह लेख 1499 में गुरु नानक देव जी के काली बेईं नदी में प्रवेश, तीन दिनों तक उनके लुप्त रहने और उस अनुभव से रूपांतरित होकर लौटने की घटना का वर्णन करता है। लौटकर उन्होंने घोषणा की, “न कोई हिंदू, न कोई मुसलमान”, और सिखाया कि परमात्मा एक है और सभी सच्चे मार्ग उसी एक सत्य की ओर ले जाते हैं।

उद्भव और मार्कण्डेय की कथा