नाम सिमरन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
नाम का स्मरण
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'नाम' (ईश्वर का नाम) + 'सिमरन' (स्मरण करना) से — वाहेगुरु के नाम का निरंतर, प्रेममय स्मरण।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरबाणी में नाम सिमरन को समस्त दुखों के उपचार के रूप में बताया गया है, जो कर्मकांडीय पूजा से भिन्न, मन को भीतर से शांत करने का साधन है।