Bharat Devotion

निर्गुण

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

गुणों, रूपों और सीमाओं से परे सर्वव्यापी परमात्मा

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'निर्' + 'गुण' (सत्त्व, रज, तम से अतीत)।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

संत कबीर की भक्ति का सार — घट-घट में वास करने वाले निराकार राम की उपासना।

निर्गुण का उल्लेख इन लेखों में