प्रत्याहार
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
इंद्रियों का पीछे हटना
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'प्रति' (दूर) और 'आहार' (भोजन, इंद्रियों का भोजन) से बना; अष्टांग योग का पाँचवाँ अंग, जिसमें इंद्रियों को बाहरी वस्तुओं से दूर, अंतर्मुखी किया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
प्रत्याहार योग के बाह्य अंगों तथा आंतरिक अंगों के बीच का जोड़ है — कछुए के अपने अंगों को खोल में समेटने की भांति, यह ध्यान आरंभ होने हेतु इंद्रियों से ध्यान हटाता है।