ऋषि
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
द्रष्टा, मुनि
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'ऋष्' से — प्रत्यक्ष रूप से देखना या अनुभव करना — एक मुनि जिसने वैदिक स्तोत्रों को मौलिक रूप से रचने के बजाय आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि से अनुभूत किया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
ऋग्वेद के स्तोत्र पारंपरिक रूप से मानवीय आविष्कार को नहीं बल्कि विश्वामित्र तथा वशिष्ठ जैसे ऋषियों को दिए जाते हैं जिन्होंने ब्रह्मांड में पहले से विद्यमान शाश्वत सत्यों को 'सुना' (श्रुति)।