सम्यक चारित्र
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सम्यक आचरण
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सम्यक' और 'चारित्र' (आचरण) से बना; त्रिरत्न में से तीसरा — सच्ची श्रद्धा तथा ज्ञान को व्रतों, अहिंसा तथा आत्म-अनुशासन द्वारा व्यवहार में उतारना।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
त्रिरत्न तभी पूर्ण होता है जब तीनों एक साथ मौजूद हों — अकेला आचरण, अंधी श्रद्धा या शुष्क ज्ञान मोक्ष तक नहीं पहुँचा सकते।