सम्यक दर्शन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सम्यक श्रद्धा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सम्यक' (सत्य) और 'दर्शन' (दर्शन, श्रद्धा) से बना; त्रिरत्न में से प्रथम — तीर्थंकरों द्वारा उपदेशित सत्य में अटूट श्रद्धा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सम्यक दर्शन के बिना, ज्ञान तथा आचरण भी मोक्ष की ओर नहीं ले जा सकते — यह वह आधार है जिस पर शेष दो रत्न टिके रहते हैं।