सम्यक ज्ञान
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सम्यक ज्ञान
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सम्यक' और 'ज्ञान' से बना; त्रिरत्न में से दूसरा — तत्वों का त्रुटि-रहित, संशय-रहित ज्ञान जो सच्ची श्रद्धा के बाद उदित होता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
जैन परंपरा ज्ञान को पाँच स्तरों में वर्गीकृत करती है, जो इंद्रिय-आधारित मतिज्ञान से आरंभ होकर सर्वज्ञ केवलज्ञान तक पहुँचती है।