शब्द
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
शब्द, पवित्र ध्वनि
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'शब्द' (ध्वनि, वचन) से — कबीर के प्रयोग में, समस्त सृष्टि के मूल में स्थित आदि दैवीय शब्द या स्पंदन, जिसे बाहरी रूप से पढ़ने के बजाय भीतर अनुभूत किया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कबीर ने सिखाया कि सच्चा गुरु शब्द स्वयं है — आंतरिक, निराकार मार्गदर्शन — एक प्रसिद्ध दोहे में घोषित करते हुए कि एक बार भीतर जीवंत शब्द का साक्षात्कार होने पर उन्होंने अपनी ही पुस्तकें जला दीं।