स्तूप
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
टीला; ढेर
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'स्तूप्' (ढेर लगाना) से; मूलतः बुद्ध के अवशेषों हेतु समाधि-टीले, जो बौद्ध एशिया में गुंबदाकार स्मारकों में विकसित हुए।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
स्तूप की दक्षिणावर्त परिक्रमा करना एक भक्ति अभ्यास है जो धर्म-चक्र के घूमने और स्वयं की जागरण की ओर प्रगति का प्रतीक है।