शून्यता
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
शून्यता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'शून्य' (शून्य, रिक्त) से; नागार्जुन द्वारा विकसित महायान शिक्षा, कि सभी घटनाओं में स्वतंत्र, अंतर्निहित अस्तित्व का अभाव है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
शून्यता कोई अभाव नहीं बल्कि स्थायी, स्वतंत्र सार का अभाव है — यही कारण है कि घटनाएँ उत्पन्न, परिवर्तित और परस्पर संबंधित हो सकती हैं।