स्याद्वाद
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
कदाचित-वाद, सशर्त कथन
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'स्यात्' (कदाचित, किसी दृष्टि से) से — प्रत्येक कथन को दृष्टिकोण-सापेक्ष मानते हुए, सात सशर्त कथनों (सप्तभंगी) द्वारा सत्य प्रस्तुत करने की जैन तार्किक पद्धति।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
स्याद्वाद अनेकांतवाद का तार्किक उपकरण है, जो सिखाता है कि 'हां' तथा 'नहीं' दोनों एक ही वस्तु के विषय में, भिन्न दृष्टिकोणों से, एक साथ सत्य हो सकते हैं।