महर्षि पतंजलि के योगसूत्र — चित्त-वृत्ति निरोध और ध्यान के गूढ़ संस्कृत सूत्र, प्रामाणिक अर्थ एवं व्याख्या सहित।
जैन साधुओं की दैनिक प्रार्थना जिसमें वे पृथ्वी, जल, बीज, पत्तों, कीड़े-मकोड़ों और अन्य एक-इंद्रिय से लेकर पाँच-इंद्रिय जीवों को चलते-फिरते अनजाने में हुई हिंसा के लिए क्षमा माँगते हैं।
यह योगसूत्र का एक खंड है जो मन की अशुद्धियों (क्लेशों) और उन्हें दूर करने के लिए अष्टांग योग के आठ अंगों की व्याख्या करता है।