करुणा और बाल-बुद्धि
पत्नी का विलाप और शक्र की करुणा
महामृत्युंजय मंत्र, ऋग्वेद 7.59.12: त्र्यम्बक (रुद्र) को समर्पित वैदिक मंत्र, आरोग्य, दीर्घायु और मृत्यु-भय से मुक्ति के लिए।
बारह श्लोकों का धन्वन्तरि स्तोत्र, जिसमें दिव्य वैद्य हरि से रोग और कष्ट से पीड़ितों की रक्षा की प्रार्थना है।
यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक शक्तिशाली स्तुति है, जिसमें वे अपनी असहनीय बांह की पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमान जी से प्रार्थना करते हैं और उनकी वीरता, करुणा और शक्ति का वर्णन करते हैं।
यह एक बौद्ध सूत्र है जिसमें भगवान बुद्ध सात बोध्यंगों (जागृति के सात अंगों) का उपदेश देते हैं, जो ध्यान और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं। यह बीमारी और कष्ट से मुक्ति के लिए इन अंगों के अभ्यास की शक्ति को दर्शाता है।
चिकित्सा-बुद्ध भैषज्यगुरु की रोगहर धारणी, जो रोगियों के कल्याण और रोग-कष्ट से मुक्ति के लिए पढ़ी जाती है।
यह एक पवित्र बौद्ध मंत्र है जो सफेद तारा (श्वेत तारा) से संबंधित है। इसके जाप से आयु, पुण्य, ज्ञान और पुष्टि (समृद्धि) की प्राप्ति होती है।