निरंकार परमात्मा का ध्यान और स्वरूप
परम सत्य और एक सर्वशक्तिमान वास्तविकता
यह सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का प्रारंभिक श्लोक है, जिसमें परमात्मा के एक, सत्य, निर्भय, निर्वैर, अकाल, अजन्मा और स्वयंभू स्वरूप का वर्णन है।
यह गुरु नानक देव जी द्वारा रचित एक पवित्र प्रार्थना है, जो सिख धर्म के मूल ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब की शुरुआत में आती है। इसमें ईश्वर की एकता, उसकी महिमा और सच्चाई के मार्ग का वर्णन किया गया है।