यह एक पवित्र स्तोत्र है जिसमें भगवान भैरव के अघोर स्वरूप के एक हजार नामों का वर्णन है। यह संवाद देवी भैरवी और भगवान भैरव के बीच हुआ है।
ब्रह्माण्ड पुराण में हयग्रीव द्वारा अगस्त्य को उपदिष्ट देवी ललिता त्रिपुरसुन्दरी के १००० नाम; श्रीविद्या उपासना के १८२ श्लोक।
महाभारत के अनुशासन पर्व में शिव के एक सहस्र नामों का स्तोत्र, जिसे उपमन्यु ने श्रीकृष्ण को सुनाया और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को।
महाभारत, अनुशासन पर्व (अध्याय १४९) में भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट विष्णु के सहस्र नाम, १०८ श्लोकों में।
विष्णु सहस्रनाम का आरंभिक ध्यान-श्लोक: श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख विष्णु का ध्यान, सब विघ्नों की शांति के लिए।