Bharat Devotion

अनित्य

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

निरंतर अनित्यता तथा परिवर्तन का सार्वभौमिक नियम

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

पालि 'अ' (नहीं) तथा 'निच्च' (शाश्वत, स्थायी) से।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

यह समझना कि हर वस्तु उत्पन्न होती तथा नष्ट होती है, मन को आसक्ति तथा शोक से मुक्त करता है।

अनित्य का उल्लेख इन लेखों में