अनित्य
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
निरंतर अनित्यता तथा परिवर्तन का सार्वभौमिक नियम
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
पालि 'अ' (नहीं) तथा 'निच्च' (शाश्वत, स्थायी) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह समझना कि हर वस्तु उत्पन्न होती तथा नष्ट होती है, मन को आसक्ति तथा शोक से मुक्त करता है।