Bharat Devotion

अर्हत

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

योग्य व्यक्ति

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'अर्ह्' (योग्य होना) से; वह जिसने सभी दोषों का नाश कर इसी जीवन में निर्वाण प्राप्त किया, पूजनीय।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

थेरवाद परंपरा में अर्हत साधना का आदर्श लक्ष्य है — स्वयं के परिश्रम से प्राप्त पूर्ण मुक्ति।

अर्हत का उल्लेख इन लेखों में