धर्म
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
जो सबको धारण करे — सत्य, कर्तव्य और सदाचार का मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत धातु 'धृ' (धारण करना) — धारणाद् धर्म इत्याहुः धर्मो धारयते प्रजाः।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह केवल मत या पंथ नहीं, अपितु जीवन को सन्मार्ग पर चलाकर सृष्टि का संतुलन बनाए रखने का नियम है।