दुःख
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
प्रत्ययजन्य अस्तित्व का अंतर्निहित असंतोष तथा बेचैनी
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
पालि/संस्कृत 'दुष्' (बुरा, कठिन) तथा 'ख' (पहिये का धुरी-छिद्र, स्थान) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
प्रथम आर्य सत्य: यह पहचानना कि अनित्य वस्तुओं से आसक्ति दुःख उत्पन्न करती है।