गुरु ग्रंथ साहिब
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गुरु का ग्रंथ
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'गुरु' (आध्यात्मिक मार्गदर्शक) और 'ग्रंथ' (पुस्तक) से बना; 1708 में गुरु गोबिंद सिंह ने इसे शाश्वत गुरु घोषित किया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सिख इसे जीवित गुरु मानते हैं, न कि केवल एक ग्रंथ — हर गुरुद्वारे में इसे जीवित गुरु जैसा सम्मान दिया जाता है।