केवलज्ञान
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पूर्ण, शुद्ध ज्ञान
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'केवल' (अकेला, पूर्ण, शुद्ध) + 'ज्ञान' से — समस्त कर्मों के क्षय से प्रकट होने वाला सर्वज्ञता का असीमित ज्ञान।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
तीर्थंकर तथा केवली जिस क्षण केवलज्ञान प्राप्त करते हैं, वे भूत, वर्तमान, तथा भविष्य के समस्त पदार्थों को एक साथ, प्रत्यक्ष रूप से जानते हैं — अनुमान द्वारा नहीं।