प्रसाद
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
ईश्वर को अर्पित किया गया वह नैवेद्य जो कृपा स्वरूप प्राप्त होता है
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'प्र' + 'सद्' (प्रसन्न होना, निर्मल होना)। अंतःकरण की प्रसन्नता और ईश्वर की कृपा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
भगवान को भोग लगाने के बाद भोजन केवल आहार न रहकर आध्यात्मिक आशीर्वाद बन जाता है।