प्रतिक्रमण
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
वापस लौटना, प्रायश्चित्त
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'प्रति' (वापस) + 'क्रमण' (चलना) से — आत्मा को भूलों से पुनः धर्म की ओर 'मोड़ने' की दैनिक आत्मनिरीक्षण विधि।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
साधुओं द्वारा प्रतिदिन तथा श्रावकों द्वारा कम से कम पर्युषण के दौरान किया जाने वाला प्रतिक्रमण, दिन या वर्ष के दौरान जाने-अनजाने हुई हिंसा हेतु क्षमा मांगने की औपचारिक विधि है।