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पुराण

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

जो प्राचीन है

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'पुराण' (प्राचीन) से; अठारह प्रमुख ग्रंथों की एक विधा जो ब्रह्मांडविज्ञान, देवताओं व राजाओं की वंशावली, तथा भक्ति कथा को मिलाती है, परंपरागत रूप से पाँच विषयों को समाहित करती है — सृष्टि, प्रलय, वंश, कल्प, तथा वंशावली।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

पुराणों ने हिंदू दर्शन को लोकतांत्रिक बनाया — जहाँ वैदिक संस्कृत विद्वानों हेतु आरक्षित थी, वहीं पौराणिक कथाओं ने वही सत्य यादगार कथा के माध्यम से सामान्य लोगों तक पहुँचाया।

पुराण का उल्लेख इन लेखों में

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सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता का चार-दिवसीय पर्व, जो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में कठोर व्रत तथा नदी-तट पूजा के साथ मनाया जाता है।

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अर्थ, धार्मिक महत्व और पवित्र परंपराएं

केरल का सबसे बड़ा पर्व राजा महाबली के वार्षिक आगमन का स्मरण कराता है—वह उदार असुर राजा जिन्हें विष्णु ने वामन रूप में पाताल भेजा, पर हर वर्ष लौटने का वर दिया।