Bharat Devotion

साधना

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

आध्यात्मिक साधना; लक्ष्य का साधन

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'साध्' (सफल होना, पूर्ण करना) से; कोई भी अनुशासित, सतत आध्यात्मिक अभ्यास — ध्यान, मंत्र जप, अनुष्ठान, तपस्या, या अध्ययन — जो आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने के विशिष्ट उद्देश्य से किया जाता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

छिटपुट प्रार्थना के विपरीत, साधना नियमितता तथा समय के साथ कठोरता का संकेत देती है — भारत भर की आध्यात्मिक परंपराएँ इस बात पर बल देती हैं कि तीव्रता से अधिक निरंतरता ही अभ्यास को साक्षात्कार में बदल देती है।

साधना का उल्लेख इन लेखों में

प्रभात के ध्यान की अमृतमयी घड़ियाँ

दैनिक पाठ और विचार-चिंतन

श्वास-प्रश्वास की सजगता एवं भगवान बुद्ध की मूल ध्यान साधना

रात्रि में वनपशुओं की गर्जना से भयभीत एक शिष्य को बोधिसत्व सिखाते हैं कि भय चंचल मन में ही उत्पन्न होता है, और स्मृति (सति) से वह विलीन हो जाता है।

भगवान के चरणामृत का आध्यात्मिक महत्व और ग्रहण करने का नियम

सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता का चार-दिवसीय पर्व, जो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में कठोर व्रत तथा नदी-तट पूजा के साथ मनाया जाता है।