समाधि
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पूर्ण लय, समाहित होना
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सम्' (साथ) + 'आ' + 'धा' (धारण करना/रखना) से — शाब्दिक रूप से 'साथ रखना', वह अवस्था जिसमें ध्याता, ध्यान, तथा ध्येय एक हो जाते हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
पतंजलि के अष्टांग योग का आठवां तथा अंतिम अंग, समाधि को सामान्य चेतना से परे उस अवस्था के रूप में वर्णित किया गया है जहां व्यष्टि अहं-बोध अस्थायी रूप से शुद्ध चेतना में विलीन हो जाता है।