Bharat Devotion

संघ

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

समुदाय, संघ

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत/पालि 'संघ' से — एक समूह — बौद्ध साधकों का मठवासी तथा गृहस्थ समुदाय, बुद्ध एवं धम्म के साथ त्रिरत्न में से एक।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

संघ की शरण लेने का अर्थ है मार्ग पर साथी साधकों के समर्थन तथा उदाहरण पर निर्भर रहना, यह स्वीकार करते हुए कि आध्यात्मिक विकास विरले ही एकांत में प्राप्त होता है।

संघ का उल्लेख इन लेखों में

गुण को सार्वभौमिक जैन प्रणाम

चौथे तीर्थंकर, जो राजा संवर तथा रानी सिद्धार्था को अयोध्या में सुनहरी आभा के साथ जन्मे, ने अपना सिंहासन मुक्ति के कठिन मुकुट हेतु त्याग दिया।

भद्रबाहु, अंतिम श्रुतकेवली जिन्होंने संपूर्ण जैन शास्त्र स्मृति में धारण किए, उस अकाल के साक्षी बने जिसने उनकी स्मृति को कर्नाटक और नेपाल के बीच विभाजित कर दिया।

अजितनाथ, जो राजा जितशत्रु तथा रानी विजया को अयोध्या में जन्मे, दूसरे तीर्थंकर बने जिनका नाम बाहरी नहीं अपितु आंतरिक शत्रुओं पर विजय घोषित करता है।

कलिंग युद्ध की विभीषिका के पश्चात अशोक ने बल द्वारा विजय को त्यागकर धम्म द्वारा विजय अपनाई, और उनके अभिलेखों तथा दूतों ने बौद्ध धर्म को समस्त एशिया में फैलाया।

महावीर की प्रथम स्त्री शिष्या