Bharat Devotion

सेवा

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

बिना किसी स्वार्थ या अहंकार के दूसरों की भलाई करना

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'सेवा' (भक्तिपूर्वक सहायता करना) से।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

सिख जीवन के तीन स्तंभों में से एक; मानवता की सेवा को ईश्वर की प्रत्यक्ष उपासना माना जाता है।

सेवा का उल्लेख इन लेखों में