शक्ति
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
दिव्य स्त्री शक्ति
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'शक्' से — समर्थ होना, शक्ति रखना — देवी के रूप में मूर्तिमान गतिशील, सृजनात्मक ऊर्जा, जिसके बिना शिव भी निष्क्रिय कहे जाते हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
शाक्त परंपराएं इस ऊर्जा को दुर्गा तथा काली जैसे रूपों में देवी के रूप में सीधे पूजती हैं, यह मानते हुए कि स्त्री सिद्धांत पुल्लिंग ईश्वर के अधीन नहीं बल्कि उसका सक्रिय पूरक है।