सिद्धि
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
उपलब्धि; सिद्धता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'सिध्' (पूर्ण करना) से; पतंजलि के योग सूत्र (तृतीय अध्याय) में वर्णित असाधारण शक्तियाँ जो गहन ध्यान-सिद्धि से उत्पन्न हो सकती हैं, बढ़ी हुई अनुभूति से लेकर अधिक असामान्य क्षमताओं तक।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
पतंजलि स्वयं चेतावनी देते हैं कि सिद्धियाँ, यद्यपि वास्तविक हैं, मार्ग में विकर्षण हैं — ऐसी शक्तियाँ जिन्हें देखा व त्यागा जाना चाहिए, कभी पीछा नहीं किया जाना चाहिए, अन्यथा वे मुक्ति के स्थान पर लक्ष्य बन जाएँगी।