स्तोत्र
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
स्तुति एवं प्रशंसात्मक स्तुतिकाव्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत धातु 'स्तु' (स्तुति करना) से व्युत्पन्न।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
ईश्वर के दिव्य गुणों का काव्यात्मक गान, जो चित्त को एकाग्र और शांत करता है।