Bharat Devotion

स्तोत्र

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

स्तुति एवं प्रशंसात्मक स्तुतिकाव्य

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत धातु 'स्तु' (स्तुति करना) से व्युत्पन्न।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

ईश्वर के दिव्य गुणों का काव्यात्मक गान, जो चित्त को एकाग्र और शांत करता है।

प्रमुख स्तोत्र पाठ व भजन

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स्तोत्र

गणेश जी की प्रिय प्रार्थना: वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्यों के तेज वाले देव, मेरे सब कार्य सदा निर्विघ्न करें।

1 verse
स्तोत्र

शिव ताण्डव स्तोत्रम्: शिवजी के ताण्डव नृत्य के 15 संस्कृत श्लोक, परम्परा से रावण को श्रेय; प्रदोष काल में पाठ्य।

15 verses
स्तोत्र

महाराष्ट्र के आठ गणेश तीर्थों का नाम लेने वाला एक श्लोक का स्तोत्र, मोरगाँव के मोरेश्वर से रांजणगाँव के गणपति तक, सदा मंगल की प्रार्थना के साथ।

2 verses
स्तोत्र

यह एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की स्तुति करता है। इसमें हनुमान जी के गुणों, रामभक्ति और राम नाम के महिमा का वर्णन है।

22 verses
स्तोत्र

यह देवी भागवत पुराण का एक स्तोत्र है, जो माँ संध्या (जिन्हें गायत्री, सावित्री और सरस्वती भी कहा जाता है) की महिमा का वर्णन करता है। इसमें माता के कई रूपों, उनकी शक्तियों और इस स्तोत्र के पाठ से मिलने वाले लाभों का उल्लेख है।

29 verses
स्तोत्र

शिव पार्वती को नर्मदा तट के ओंकार क्षेत्र, उसके पावन कुण्ड और रक्षक गणों की महिमा सुनाते हैं, और बताते हैं कि गणों ने इन्द्र को पराजित किया, जो लिंग की शरण में गया।

20 verses

स्तोत्र का उल्लेख इन लेखों में