तीर्थंकर
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
घाट-निर्माता / पुनर्जन्म के सागर से पार कराने वाला आध्यात्मिक विजेता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'तीर्थ' (घाट, पार करने का स्थान) तथा 'कर' (निर्माता) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
जैन धर्म के 24 सर्वज्ञ आध्यात्मिक गुरु, जो आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाकर मुक्ति का मार्ग सिखाते हैं।