त्रिरत्न
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
तीन बहुमूल्य रत्न
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'त्रि' (तीन) और 'रत्न' से बना; बुद्ध, धर्म और संघ को दर्शाता है — तीन शरण जिन्हें हर अभ्यासरत बौद्ध लेता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
शरण-सूत्र 'मैं बुद्ध, धर्म और संघ की शरण लेता हूँ' का उच्चारण करना वह पारंपरिक कार्य है जिससे व्यक्ति औपचारिक रूप से बौद्ध बनता है।