बंध
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
बांधना; ताला
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'बंध्' (बांधना) से; एक आंतरिक पेशीय ताला — जैसे मूल बंध या जालंधर बंध — जिसका उपयोग हठ योग में शरीर के भीतर प्राण को सील करने व निर्देशित करने हेतु किया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
बंध शरीर की ऊर्जा-प्रणाली में वाल्व की भांति कार्य करते हैं, प्राण को बहने से रोककर उन्नत साधना के दौरान इसे सचेत रूप से ऊपर की ओर प्रवाहित करते हैं।