Bharat Devotion

बंध

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

बांधना; ताला

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'बंध्' (बांधना) से; एक आंतरिक पेशीय ताला — जैसे मूल बंध या जालंधर बंध — जिसका उपयोग हठ योग में शरीर के भीतर प्राण को सील करने व निर्देशित करने हेतु किया जाता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

बंध शरीर की ऊर्जा-प्रणाली में वाल्व की भांति कार्य करते हैं, प्राण को बहने से रोककर उन्नत साधना के दौरान इसे सचेत रूप से ऊपर की ओर प्रवाहित करते हैं।

बंध का उल्लेख इन लेखों में

अंजना की शिव से तपस्या तथा वायु द्वारा दिए गए पवित्र पायसम ने हनुमान को जन्म दिया, जिन्होंने बाल्यावस्था में स्वयं सूर्य को निगलने का प्रयास किया।

देवकी की आठवीं संतान के रूप में एक कारागार में जन्मे कृष्ण को वासुदेव ने अत्याचारी कंस से बचाने हेतु उफनती यमुना नदी पार कराई।

एक राजा की आत्मा को मुक्त करना

भविष्योत्तर पुराण में वर्णित चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचिनी एकादशी की पावन कथा, जिसके प्रभाव से ऋषि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा घोर शाप व पापों से मुक्त हुए थे।

पशु-बलि से मुक्ति नहीं मिलती

बाज का मित्रों का संघ