Bharat Devotion

ध्यान

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

ध्यान, चिंतन

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'ध्यै' से — सोचना, चिंतन करना — किसी एक वस्तु, देवता, या सत्य की ओर निरंतर, अविच्छिन्न ध्यान-प्रवाह।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

पतंजलि के योग के आठ अंगों में सातवां, ध्यान केंद्रित एकाग्रता (धारणा) तथा पूर्ण समाधि (समाधि) के मध्य की ध्यानावस्था है, जो लगभग समस्त भारतीय चिंतनशील साधना का केंद्र है।

ध्यान का उल्लेख इन लेखों में