Bharat Devotion

इंद्रिय

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

ज्ञान तथा कर्म की इंद्रियाँ

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

वैदिक ब्रह्मांडविज्ञान में इंद्रियों के स्वामी इंद्र के नाम पर रखा गया; अनुभूति तथा कर्म की दस क्षमताएँ — पाँच ज्ञानेंद्रिय (इंद्रियाँ: दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद, स्पर्श) तथा पाँच कर्मेंद्रिय (कर्म के अंग: वाणी, हाथ, पैर, उत्सर्जन, प्रजनन)।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

योगिक तथा तपस्वी अनुशासन विशेष रूप से इंद्रियों को लक्षित करते हैं क्योंकि वे वे द्वार हैं जिनके माध्यम से बाहरी संसार भीतर बहकर आंतरिक स्थिरता को अस्थिर करता है।

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