Bharat Devotion

कल्प

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

ब्रह्मा का एक दिन; लौकिक युग

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'कल्प' (युग, क्रम) से; सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के जीवन में एक दिन के बराबर विशाल लौकिक कालचक्र, जो 4.32 अरब मानव वर्षों तक चलता है, जिसके अंत में ब्रह्मांड विलीन होकर पुनः रचा जाता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

कल्प का विशाल पैमाना मानवीय आत्म-महत्व को विनम्र बनाने हेतु है — अरबों वर्षों के परिदृश्य के सामने, व्यक्तिगत चिंताएँ अपने सच्चे, क्षणिक अनुपात में सिमट जाती हैं।

कल्प का उल्लेख इन लेखों में

पवित्र दृढ़ता का वैदिक विज्ञान

चौथे तीर्थंकर, जो राजा संवर तथा रानी सिद्धार्था को अयोध्या में सुनहरी आभा के साथ जन्मे, ने अपना सिंहासन मुक्ति के कठिन मुकुट हेतु त्याग दिया।

अजितनाथ, जो राजा जितशत्रु तथा रानी विजया को अयोध्या में जन्मे, दूसरे तीर्थंकर बने जिनका नाम बाहरी नहीं अपितु आंतरिक शत्रुओं पर विजय घोषित करता है।

राजा सिंहसेन तथा रानी सुयशा के पुत्र, चौदहवें तीर्थंकर, एक विशाल राज्य का त्याग करते हैं उस असीम मुक्ति हेतु जिसका वचन उनके अपने ही नाम ने दिया था।

चंद्रप्रभा, जो चंद्रपुरी में चंद्रमा के चिह्न के अंतर्गत जन्मे, आठवें तीर्थंकर बने जिनका नाम, चांदनी, सिखाता है कि शांति मुक्ति की नींव है।

धर्मनाथ, पंद्रहवें तीर्थंकर, जो राजा भानु तथा रानी सुव्रता को रत्नपुरी में जन्मे, अपने ही नाम में वह शब्द धारण करते हैं जो इस भूमि की नैतिक शब्दावली का आधार है।