कल्प
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
ब्रह्मा का एक दिन; लौकिक युग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'कल्प' (युग, क्रम) से; सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के जीवन में एक दिन के बराबर विशाल लौकिक कालचक्र, जो 4.32 अरब मानव वर्षों तक चलता है, जिसके अंत में ब्रह्मांड विलीन होकर पुनः रचा जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कल्प का विशाल पैमाना मानवीय आत्म-महत्व को विनम्र बनाने हेतु है — अरबों वर्षों के परिदृश्य के सामने, व्यक्तिगत चिंताएँ अपने सच्चे, क्षणिक अनुपात में सिमट जाती हैं।