प्राण
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
समस्त सजीव सृष्टि को जीवन प्रदान करने वाली सूक्ष्म ऊर्जा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'प्र' (मुख्य) + 'अन्' (श्वास लेना/गतिशील होना)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
शरीर के सभी अंगों और नाड़ियों को क्रियाशील रखने वाली प्राणिक शक्ति।