सूर्य नमस्कार
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सूर्य को प्रणाम
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सूर्य' और 'नमस्कार' (प्रणाम) से बना; बारह जुड़े हुए आसनों का क्रम, जो सूर्य के प्रति कृतज्ञता की एक गतिशील प्रार्थना के रूप में किया जाता है, परंपरागत रूप से प्रातःकाल में अभ्यास किया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
बारह आसनों में से प्रत्येक को परंपरागत रूप से सूर्य के बारह नामों में से एक तथा एक श्वास के साथ जोड़ा जाता है, जो व्यायाम जैसे दिखने वाले क्रम को स्मरण की अटूट श्रृंखला में बदल देता है।