Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनामावली: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनामावली

देवी सरस्वती के 108 नामों की नामावली, वाणी, विद्या और संगीत की दात्री; वसंत पंचमी तथा विद्यार्थियों और विद्वानों द्वारा पाठ्य।

श्लोक

१०८ पावन नामावली

भगवान के १०८ दिव्य नाम, जिनका 'ॐ' एवं 'नमः' के साथ अर्चन व जप किया जाता है।

ॐ सरस्वत्यै नमः

श्लोक 1

ॐ महाभद्रायै नमः

श्लोक 2

ॐ महामायायै नमः

श्लोक 3

ॐ वरप्रदायै नमः

श्लोक 4

ॐ श्रीप्रदायै नमः

श्लोक 5

ॐ पद्मनिलयायै नमः

श्लोक 6

ॐ पद्माक्ष्यै नमः

श्लोक 7

ॐ पद्मवक्त्रायै नमः

श्लोक 8

ॐ शिवानुजायै नमः

श्लोक 9

ॐ पुस्तकभृते नमः

श्लोक 10

ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः

श्लोक 11

ॐ रमायै नमः

श्लोक 12

ॐ परायै नमः

श्लोक 13

ॐ कामरूपायै नमः

श्लोक 14

ॐ महाविद्यायै नमः

श्लोक 15

ॐ महापातकनाशिन्यै नमः

श्लोक 16

ॐ महाश्रयायै नमः

श्लोक 17

ॐ मालिन्यै नमः

श्लोक 18

ॐ महाभोगायै नमः

श्लोक 19

ॐ महाभुजायै नमः

श्लोक 20

ॐ महाभागायै नमः

श्लोक 21

ॐ महोत्साहायै नमः

श्लोक 22

ॐ दिव्याङ्गायै नमः

श्लोक 23

ॐ सुरवन्दितायै नमः

श्लोक 24

ॐ महाकाल्यै नमः

श्लोक 25

ॐ महापाशायै नमः

श्लोक 26

ॐ महाकारायै नमः

श्लोक 27

ॐ महाङ्कुशायै नमः

श्लोक 28

ॐ पीतायै नमः

श्लोक 29

ॐ विमलायै नमः

श्लोक 30

ॐ विश्वायै नमः

श्लोक 31

ॐ विद्युन्मालायै नमः

श्लोक 32

ॐ वैष्णव्यै नमः

श्लोक 33

ॐ चन्द्रिकायै नमः

श्लोक 34

ॐ चन्द्रवदनायै नमः

श्लोक 35

ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः

श्लोक 36

ॐ सावित्र्यै नमः

श्लोक 37

ॐ सुरसायै नमः

श्लोक 38

ॐ देव्यै नमः

श्लोक 39

ॐ दिव्यालङ्कारभूषितायै नमः

श्लोक 40

ॐ वाग्देव्यै नमः

श्लोक 41

ॐ वसुधायै नमः

श्लोक 42

ॐ तीव्रायै नमः

श्लोक 43

ॐ महाभद्रायै नमः

श्लोक 44

ॐ महाबलायै नमः

श्लोक 45

ॐ भोगदायै नमः

श्लोक 46

ॐ भारत्यै नमः

श्लोक 47

ॐ भामायै नमः

श्लोक 48

ॐ गोविन्दायै नमः

श्लोक 49

ॐ गोमत्यै नमः

श्लोक 50

ॐ शिवायै नमः

श्लोक 51

ॐ जटिलायै नमः

श्लोक 52

ॐ विन्ध्यावासायै नमः

श्लोक 53

ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः

श्लोक 54

ॐ चण्डिकायै नमः

श्लोक 55

ॐ वैष्णव्यै नमः

श्लोक 56

ॐ ब्राह्मयै नमः

श्लोक 57

ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः

श्लोक 58

ॐ सौदामिन्यै नमः

श्लोक 59

ॐ सुधामूर्त्यै नमः

श्लोक 60

ॐ सुभद्रायै नमः

श्लोक 61

ॐ सुरपूजितायै नमः

श्लोक 62

ॐ सुवासिन्यै नमः

श्लोक 63

ॐ सुनासायै नमः

श्लोक 64

ॐ विनिद्रायै नमः

श्लोक 65

ॐ पद्मलोचनायै नमः

श्लोक 66

ॐ विद्यारूपायै नमः

श्लोक 67

ॐ विशालाक्ष्यै नमः

श्लोक 68

ॐ ब्रह्मजायायै नमः

श्लोक 69

ॐ महाफलायै नमः

श्लोक 70

ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः

श्लोक 71

ॐ त्रिकालज्ञायै नमः

श्लोक 72

ॐ त्रिगुणायै नमः

श्लोक 73

ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः

श्लोक 74

ॐ शुम्भासुरप्रमथिन्यै नमः

श्लोक 75

ॐ शुभदायै नमः

श्लोक 76

ॐ स्वरात्मिकायै नमः

श्लोक 77

ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः

श्लोक 78

ॐ चामुण्डायै नमः

श्लोक 79

ॐ अम्बिकायै नमः

श्लोक 80

ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः

श्लोक 81

ॐ धूम्रलोचनमर्दनायै नमः

श्लोक 82

ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः

श्लोक 83

ॐ सौम्यायै नमः

श्लोक 84

ॐ सुरासुरनमस्कृतायै नमः

श्लोक 85

ॐ कालरात्र्यै नमः

श्लोक 86

ॐ कलाधारायै नमः

श्लोक 87

ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः

श्लोक 88

ॐ वाग्देव्यै नमः

श्लोक 89

ॐ वरारोहायै नमः

श्लोक 90

ॐ वाराह्यै नमः

श्लोक 91

ॐ वारिजासनायै नमः

श्लोक 92

ॐ चित्राम्बरायै नमः

श्लोक 93

ॐ चित्रगन्धायै नमः

श्लोक 94

ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः

श्लोक 95

ॐ कान्तायै नमः

श्लोक 96

ॐ कामप्रदायै नमः

श्लोक 97

ॐ वन्द्यायै नमः

श्लोक 98

ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः

श्लोक 99

ॐ श्वेताननायै नमः

श्लोक 100

ॐ नीलभुजायै नमः

श्लोक 101

ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः

श्लोक 102

ॐ चतुराननसाम्राज्यायै नमः

श्लोक 103

ॐ रक्तमध्यायै नमः

श्लोक 104

ॐ निरञ्जनायै नमः

श्लोक 105

ॐ हंसासनायै नमः

श्लोक 106

ॐ नीलजङ्घायै नमः

श्लोक 107

ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः

श्लोक 108

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

फलश्रुति
शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभफलश्रुति
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:प्रति नाम के साथ 'ॐ' और अंत में 'नमः' का सस्वर उच्चारण करें।

पृष्ठभूमि

सरस्वती के 108 नामों की यह नामावली उसी क्रम में है जिसमें संस्कृत डॉक्यूमेंट्स की 'सरस्वती अष्टोत्तरशतनामावली १' (एक पारम्परिक पाठ) है, और सरस्वती, महाभद्रा, महामाया, वरप्रदा, श्रीप्रदा आदि नामों से आरंभ होती है। उस सूची में कुछ नाम, जैसे महाभद्रा और वाग्देवी, दोबारा आते हैं। क्रमांक 1 से 108 तक के नाम श्वेतवस्त्रा देवी का रूप दिखाते हैं, जो वीणा, वेद, स्फटिक की माला और कमंडलु धारण कर हंस पर विराजमान हैं; इन्हें वसंत पंचमी, नवरात्रि की सरस्वती पूजा और नित्य अध्ययन के समय पढ़ा जाता है।

क्या आप जानते हैं?

नीर-क्षीर विवेकी हंस का प्रतीक

'हंसासना' (नाम १०६) देवी के हंस-आसन का स्मरण कराता है। कहा जाता है कि हंस पानी और दूध के मिश्रण में से केवल दूध ग्रहण करता है; यह साधक को सिखाता है कि संसार के प्रपंचों में से केवल सारभूत सत्य को ग्रहण करें।

तीनों वेद उनका स्वरूप

'त्रयीमूर्ति' (नाम ७१) उस देवी का नाम है जिनका स्वरूप 'त्रयी' अर्थात् तीन वेद (ऋक्, यजुः और साम) हैं; यह स्मरण कराता है कि सरस्वती पवित्र ज्ञान का ही स्रोत हैं।

देवी का वीर रूप

नाम ७५, ७८ और ७९ (शुम्भासुरप्रमथिनी, रक्तबीजनिहन्त्री, चामुण्डा) देवी माहात्म्य के प्रसंगों का स्मरण कराते हैं और दिखाते हैं कि विद्या की देवी निर्भय रक्षिका भी हैं जो अज्ञान और अधर्म का नाश करती हैं।

ऋग्वैदिक पावन नदी सरस्वती

नाम क्र. 1 'सरस्वती' उस वैदिक नदी की स्मृति है जिसे ऋग्वेद (2.41.16) में 'अम्बितमे, नदीतमे, देवितमे' (सर्वश्रेष्ठ माता, सर्वश्रेष्ठ नदी, सर्वश्रेष्ठ देवी) कहकर नमन किया गया है।

ज्ञानमुद्रा का अद्वैत संदेश

'ज्ञानमुद्रा' नाम उस हस्तमुद्रा का प्रतीक है जिसमें तर्जनी (अहंकार) अंगूठे (परमात्मा) से मिलकर झुक जाती है, जो जीव और ब्रह्म के एकत्व का बोध कराती है।

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