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Embroidered artwork for गुरुद्वारा जन्म अस्थान ननकाना साहिब: गुरु नानक देव जी का पावन प्राकट्य स्थल: Embroidered Khanda emblem with a saffron Nishan Sahib flag and marigolds at sunrise

गुरुद्वारा जन्म अस्थान ननकाना साहिब

गुरु नानक देव जी का पावन प्राकट्य स्थल

गुरुद्वारा जन्म अस्थान ननकाना साहिब

गुरु नानक देव जी का पावन प्राकट्य स्थल

ननकाना साहिब (प्राचीन राय भोई दी तलवंडी, पंजाब, पाकिस्तान) सिख धर्म के संस्थापक प्रथम पातशाह गुरु नानक देव जी का पावन जन्मस्थान (१४६९ ई.) है। यह पावन धाम गुरु जी के बाल्यकाल के चमत्कारों, समरसता और अखंड ईश्वरीय चिंतन का साक्षी है।

सत्य एवं समरसता का पावन सूर्योदय

सन् १४६९ में कार्तिक पूर्णिमा के दिन राय भोई दी तलवंडी (ननकाना साहिब) में जगत गुरु गुरु नानक देव जी का प्राकट्य हुआ। बाल्यकाल से ही गुरु जी ने समाज के आडंबरों को त्यागकर 'एक ओंकार' और 'सरबत दा भला' (समस्त सृष्टि के कल्याण) का अमर संदेश दिया।

गुरुद्वारा जन्म अस्थान उसी पावन कक्ष के स्थान पर निर्मित है जहाँ गुरु जी का जन्म हुआ था।

ननकाना साहिब के पावन ऐतिहासिक गुरुद्वारे

गुरुद्वारा जन्म अस्थान
बाल्यकालीन लीला:गुरु नानक देव जी का जन्म स्थल (१४६९)
आध्यात्मिक संदेश:केंद्रीय पावन गुरुद्वारा जहाँ अखंड गुरबाणी कीर्तन होता है।
गुरुद्वारा बाल लीला
बाल्यकालीन लीला:बाल सखाओं के साथ खेलने का स्थान
आध्यात्मिक संदेश:जहाँ गुरु जी बाल्यकाल में बच्चों को ईश्वर भक्ति सिखाते थे।
गुरुद्वारा पट्टी साहिब
बाल्यकालीन लीला:प्राथमिक पाठशाला
आध्यात्मिक संदेश:जहाँ बालक नानक ने पंडित जी को आध्यात्मिक वर्णमाला का अर्थ समझाया।
गुरुद्वारा कियारा साहिब
बाल्यकालीन लीला:खेत जहाँ गायें चराई थीं
आध्यात्मिक संदेश:जहाँ ध्यानमग्न होने पर भी नष्ट हुआ खेत पुनः हरा-भरा हो गया था।
गुरुद्वारा माल जी साहिब
बाल्यकालीन लीला:माल (जाल) वृक्ष के नीचे
आध्यात्मिक संदेश:जहाँ नागराज ने सोते हुए बालक नानक को धूप से बचाने हेतु फण फैलाया था।
गुरुद्वारा तंबू साहिब
बाल्यकालीन लीला:तंबू नुमा वृक्ष के नीचे
आध्यात्मिक संदेश:सच्चा सौदा (साधुओं को भोजन) कर लौटने पर विश्राम का स्थल।

पावन अरदास वचन

नानक नाम चह्‍ड़दी कला

तेरे भाणे सरबत दा भला॥

क्या आप जानते हैं?

सच्चा सौदा

पिता द्वारा दिए गए २० रुपयों से व्यापार करने के बजाय गुरु नानक देव जी ने भूखे साधुओं को भोजन कराकर 'सच्चा सौदा' किया।

नित्य अरदास में स्मरण

विश्व भर के गुरुद्वारों में प्रतिदिन अरदास में ननकाना साहिब के खुले दर्शन-दीदार की प्रार्थना की जाती है।

पट्टी साहिब की वर्णमाला

मात्र सात वर्ष की आयु में बालक नानक ने गुरुमुखी अक्षरों पर आधारित अमर दार्शनिक पद रचे थे।

राय बुलार का समर्पण

तलवंडी के शासक राय बुलार ने नाग द्वारा बालक नानक पर छाया करने का दृश्य देखकर उन्हें ईश्वर का अवतार माना था।

Guru Nanak Dev Ji की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Guru Nanak Dev Ji

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